जल निगम के कारण शहरवासियों को झेलना पड़ रहा है जल संकट : सुनीता दयाल

जल निगम के कारण शहरवासियों को झेलना पड़ रहा है जल संकट : सुनीता दयाल

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

गाजियाबाद। महापौर सुनीता दयाल ने सोमवार को महानगर में जलापूर्ति की समस्या के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जल निगम नगर निगम से जलापूर्ति के लिए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट ले तो लेता है, मगर उन्हें समय से पूरा नहीं कर पाता।

जिसका खामियाजा आम जनता को झेलना पड़ता है और नगर निगम प्रशासन को जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ता है।

महापौर ने कहा है कि भीषण गर्मी का मौसम चल रहा है,जिसमें नगर निगम द्वारा शहरवासियों को जलापूर्ति करना मूल सुविधाओं में से एक है। गाजियाबाद नगर निगम द्वारा अथक प्रयासों से हर क्षेत्र में जलापूर्ति की व्यवस्था भी की जा रही है। ऐसे ही हमारे नगर आयुक्त एवं अन्य अधिकारी इतनी गर्मी में भी सड़कों पर कार्य कर रहे हैं, ताकि शहर में जल संकट न हो।

जल निगम, शहर में जलापूर्ति की सभी जिम्मेदारी शासन द्वारा जल निगम को दी जाती है,लेकिन इतनी बड़ी जिम्मेदारी के साथ जल निगम खरा नहीं उतर रहा है।

शहर के विभिन्न क्षेत्रों में (जैसे वार्ड 7 बिहारीपुरा, वार्ड 35 अकबरपुर बेहरामपुर, वार्ड 27 सैन विहार,वार्ड 2 राहुल विहार,के ब्लॉक विजय नगर आदि) आज भी जलापूर्ति का कार्य जल निगम देख रहा है ओर न ही नगर निगम वह योजना को हैंडओवर कर रहा है और न ही उन योजनाओं को चालू कर जनता को जलापूर्ति कर रहा है। जो योजनाएं हैंडओवर की गई हैं, उनमें बहुत बड़े पैमाने पर लापरवाही है।

जिसको नगर निगम झेल रहा है (जैसे कि सिहानी गांव में अभी टंकी की सप्लाई को शुरू करना) और ऐसी अभी बहुत कार्य हैं, जिसमें लापरवाही जल निगम ने की है और झेलना नगर निगम को पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि जल निगम द्वारा किये गए कार्य में अत्यधिक खामियां हैं, जैसे कहीं पम्प नहीं चल रहेख् उनमें झाड़ खड़े हैं। कहीं टंकी बनाई गई है। पानी की लाइन बिछाई गई है, लेकिन सप्लाई नहीं की जा रही है।

जहां पानी की लाइन है वहां लिकेज बहुत है और यह योजना पूर्ण कर नगर निगम को हैंडओवर भी नहीं की जा रही है। जिससे जल निगम द्वारा शहरवासियों को जल संकट झेलना पड़ रहा है।

महापौर ने अधिकारियों के साथ इन सभी योजनाओं का निरीक्षण किया था, जिसमें जल निगम की घोर लापरवाही सामने आयी थी। इसको लेकर जल निगम अधिकारियों के साथ बैठक भी की गई थी, जिसके परिणाम नहीं आए। उन्होंने बताया कि अब जल निगम के खिलाफ अधूरी योजनाओं और बन्द योजनाओं के खिलाफ शासन में पत्राचार किया जाएगा।

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