काशी के न्यायाधीश बाबा लाट भैरव स्वर्णमयी रथ पर सवार होकर जब माता भैरवी संग ब्याह रचाने पहुंचे, मनोरम दृश्य देख काशीवासी हुए धन्य  

When Baba Laat Bhairav, the judge of Kashi, arrived on the golden chariot to marry with Mata Bhairavi, the residents of Kashi were blessed to see the panoramic view.

शनिवार  शाम पांच बजे श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति के तत्वावधान में विशेश्वरगंज स्थित इन्ना माई की गली से बाबा श्री कपाल (लाट) भैरव जी के रजत मुखौटे का विधिवत श्रृंगार कर सिर पर मौर सजाया गया।

आचार्य पंडित रविंद्र त्रिपाठी ने षोडशोपचार पूजन कराया। मुख्य यजमान शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बरात का शुभारंभ किया।

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ
 

वाराणसी। भूतभावन भगवान शंकर की नगरी काशी शनिवार की रात भैरव के रंग में रंग गई। काशी के न्यायाधीश बाबा लाट भैरव स्वर्णमयी रथ पर सवार होकर जब माता भैरवी संग ब्याह रचाने पहुंचे तो इस मनोरम दृश्य को देखकर काशीवासी भी प्रसन्नता से भर उठे। विशेश्वरगंज से लाटभैरव मंदिर तक आस्थावानों का रेला उमड़ा और रास्ते भर फूलों की बरसात से बाबा का स्वागत किया गया। कोरोना संक्रमण काल के दो साल बाद बरात अपने पूरे रंग में नजर आई। 

शनिवार  शाम पांच बजे श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति के तत्वावधान में विशेश्वरगंज स्थित इन्ना माई की गली से बाबा श्री कपाल (लाट) भैरव जी के रजत मुखौटे का विधिवत श्रृंगार कर सिर पर मौर सजाया गया। आचार्य पंडित रविंद्र त्रिपाठी ने षोडशोपचार पूजन कराया। मुख्य यजमान शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बरात का शुभारंभ किया।

बाबा लाट भैरव की निकली शाही बरात
शहनाई की मंगल धुन, ढोल नगाड़ों की थाप, कलाकारों द्वारा भजनों की प्रस्तुति के साथ मुख्य मार्ग पर बरात सजकर तैयार हो गई। रथ पर सवार होते ही बाबा के विशालकाय मुखौटे की आभा देखते ही बन रही थी। बरात हरतीरथ चौराहा, विश्वेश्वरगंज त्रिमुहानी से होते हुए भैरवनाथ मंदिर पहुंची।
काल भैरव मंदिर प्रबंधन द्वारा बाबा को वस्त्र, काला गंडा, फूल मालाओं से विधिवत श्रृंगार कर भव्य आरती उतारी गई। आस्था की पराकाष्ठा इस कदर कि बरात को दो किलोमीटर का मार्ग तय करने में कई घंटे लग गए। शाम 5 बजे निकली बरात भोर तक अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचेगी। 

रास्ते भर जश्न का माहौल, सजे मंदिर
विशेश्वरगंज से लेकर कज्जाकपुरा तक बरात मार्ग में सभी मंदिरों में विशेष सजावट की गई थी। हर कोई लगातार पलक पांवड़े बिछाए बरात की प्रतीक्षा कर रहा था। हाथों में पुष्पाहार, पूजन सामग्रियों सहित आरती की थाल लिए घंटों बाद भक्तों को बाबा के दूल्हा स्वरूप में दर्शन मिला। बरात के दौरान काशी विश्वनाथ डमरू दल, श्री लाट भैरव डमरू दल सहित कई डमरू दलों के लगभग सैकड़ों सदस्य शोभायात्रा में डमरू निनाद करते चल रहे थे।

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