'सर वो मेरी मां के अंतिम संस्कार के पैसे हैं... प्लीज लौटा दीजिए' गाड़ी में लाश छोड़कर घंटों गिड़गिड़ाया बेटा

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Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ  

कानपुर। आकाश के आंसू ये कहते हुए थमने का नाम नहीं ले रहे थे कि सर, वो मेरी मां के अंतिम संस्कार के पैसे हैं... मुझे लौटा दीजिए मैं सच कह रहा हूं। लेकिन उसकी बातों पर कोई भी यकीन करने को तैयार नहीं था।

कांशीराम अस्पताल के बाहर गाड़ी में पड़ी मां की लाश को देखकर वह स्टाफ को बताता रहा कि यह मेरे ही रुपए हैं जो काउंटर पर छूट गए थे, इन पैसों से ही मां का अंतिम संस्कार करना है।

लेकिन उसकी इन बातों को सुनकर भी किसी का दिल नहीं पसीजा। डेढ़ घंटे तक यह सब चलता रहा और उसके बाद रुपयों को पुलिस के भेज दिया गया। वहां पुलिस के सामने भी आकाश रोता रहा।

तकरीबन पौने दो घंटे के बाद पार्षद पति के हस्तक्षेप पर उसे पैसा वापस मिला और मां अंतिम संस्कार करवाया जा सका। एक बेटे की मां के अंतिम संस्कार के लिए ऐसी जद्दोजहत देख हर व्यक्ति व्यवस्था को कोसता रहा और बेटे पर तरस खाता रहा।

गाड़ी में मां की लाश देख बेसुध हो गया था बेटा 

आपको बता दें कि मान्यवर कांशीराम अस्पताल में मंगलवार की सुबह तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे चकेरी के टटिया झनाका निवासी पेंटर आकाश अपनी 45 वर्षीय मां विजमा को भर्ती करवाने पहुंचा था।

हालांकि इलाज के दौरान मां की तबियत बिगड़ी और उसका देहांत हो गया। वह पर्चा बनाकर लौटा ही था कि गाड़ी में लाश देख बेसुध हो गया। इसी बीच उसे पता लगा कि जेब में रखे 13 हजार रुपए कहीं गिर गए हैं। इस बीच काउंटर के पास पन्नी में लिपटे रुपए मिलने पर जाजमऊ निवासी जीनत ने उसे उठाकर स्टाफ को दे दिया। 

पैसे वापस मिलने के बाद हुआ मां का अंतिम संस्कार

स्टाफ ने पैसों को सीएमएस डॉ. स्वदेश गुप्ता को सौंप दिया। इधर आकाश जब पैसे वापसी के लिए गिड़गिड़ाने लगा तो किसी को भी यकीन ही नहीं हुआ। सीएमएस ने इन रुपयों को चकेरी थाने भिजवा दिया।

मामले की सूचना मिलने के बाद गांधीधाम वार्ड के पार्षद के पति मनोज यादव भी वहां पहुंचे। उन्होंने पुलिसवालों से बातचीत की और उसके बाद आकाश का पैसा वापस किया गया। इस बीच पुलिस से तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

पैसे मिलने के बाद ही मां का अंतिम संस्कार हुआ। आकाश ने बताया कि उसके पिता ड्राइवर हैं। अगर यह पैसे नहीं मिलते तो वह मां का अंतिम संस्कार कैसे करता। वहीं उसने आरोप लगाया कि जब वह मां को लेकर इमरजेंसी में पहुंचा तो डॉक्टर नहीं थे। 

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