अयोध्या: कृषि विश्वविद्यालय में फूटा लेटर बम, छंटनी से कर्मियों में आक्रोश

अयोध्या: कृषि विश्वविद्यालय में फूटा लेटर बम, छंटनी से कर्मियों में आक्रोश

 Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ 

अयोध्या। कुमारगंज स्थित आचार्य नरेंद्र देव कृषि व प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में शासन से पत्र आने के बाद से खलबली मची हुई है। यहां सहायक प्राध्यापक के अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों पर कार्यरत कार्मिकों को सेवानिवृत्त किए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह द्वारा उठाए जा रहे कड़े कदम को लेकर अब ऐसे कार्मिक न्यायालय की शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय के कुलपति की कार्यशैली को लेकर सहायक प्राध्यापक से इतर पदों पर नियुक्त कार्मिकों में गहरा आक्रोश भी व्याप्त हो गया है।

दरअसल शासन से अपर मुख्य सचिव डॉ. देवेश चतुवेर्दी द्वारा बीते 14 जनवरी 2022 को प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों कानपुर, अयोध्या, मेरठ व बांदा के कुलपतियों को पत्र जारी करते हुए आदेश दे दिया था कि सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्त शिक्षकों व प्रोन्नति पाए प्राध्यापकों के अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों पर तैनात अन्य किसी भी कार्मिक को शिक्षक कतई न माना जाए और उन्हें शिक्षक से संबंधित कोई भी सुविधा न प्रदान की जाए।

ऐसे में यहां सीनियर रिसर्च एसोसिएट, रिसर्च एसोसिएट, जूनियर रिसर्च एसोसिएट, सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट व आईसीएआर की अन्य योजनाओं में मूलत: नियुक्त कार्मिकों की छंटनी की जा रही है।

विश्व विद्यालय कर्मियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश शासन उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ द्वारा विश्वविद्यालय में तैनात 117 कर्मियों की नियुक्ति को अनुचित करार देते हुए उन्हें तत्काल सेवा मुक्त किए जाने के आदेश दे दिए गए थे, लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रदेश के कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश शासन की ओर से प्रकरण में तत्काल कार्रवाई किए जाने हेतु मिले दर्जनों पत्रों को दरकिनार करते हुए उन पर अपनी कृपा बरसा दी है।

उन्हें विश्वविद्यालय के अन्य मदों में हुए प्राप्त धन का दुरुपयोग करते हुए वेतन प्रदान किया जा रहा है, जिसके चलते कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित पशु चिकित्सा व पशुपालन महाविद्यालय के कर्मियों को समय से वेतन भुगतान तक नहीं हो पा रहा है। कहना है कि कुलपति की हठधर्मिता के चलते विश्व विद्यालय कर्मियों के बीच यह विसंगति पैदा हुई है, जिसका दंश हम सब झेल रहे हैं।

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