222 साल से बनारस में चली आ रही जगन्नाथ यात्रा में काशी के 50 हजार भक्तों ने बरसाए फूल, शुरू हुआ लक्खा मेला

काशी में 5 किमी लंबी जगन्नाथ यात्रा:50 हजार भक्तों बरसाए फूल, अब 3 दिन चलेगा लक्खा मेला

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

 

वाराणसी। काशी में जगन्नाथ यात्रा निकाली गई। इसके साथ लक्खा मेला भी शुरू हो गया है। करीब 5 किलोमीटर लंबी यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा ने भक्तों को दर्शन दिए। 50 हजार भक्तों ने रथयात्रा पर फूल बरसाए। ये रवायत 222 साल से बनारस में चली आ रही है।

शनिवार को भगवान जगन्नाथ डोली में सवार होकर निकले। अस्सी से लोलार्क कुंड, नवाबगंज, कश्मीरी गंज, शंकुलधारा और बैजनत्था मंदिर से होते हुए भगवान और भक्तों की टोली रथयात्रा चौराहे जो कभी बेनी का बाग तक पहुंचेगी।

देखिए तस्वीरें...

भगवान जगन्नाथ की यात्रा शंकुलधारा से निकलकर रथयात्रा पहुंच रही है।

भगवान जगन्नाथ की यात्रा शंकुलधारा से निकलकर रथयात्रा पहुंच रही है।

जगन्नाथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई। लाखों भक्त इस दौरान मौजूद रहे।

जगन्नाथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई। लाखों भक्त इस दौरान मौजूद रहे।

डमरू और शंख की नाद पर अस्सी से निकलती रथयात्रा।

डमरू और शंख की नाद पर अस्सी से निकलती रथयात्रा।

काशी में अस्सी जगन्नाथ मंदिर के पास डमरू और मंजीरा बजाए गए।

काशी में अस्सी जगन्नाथ मंदिर के पास डमरू और मंजीरा बजाए गए।

शंकुलधारा में द्वारिकाधीशपीठ पर पालकी थोड़ी देर के लिए रुकी जहां परछन की रस्म निभाई गई।

शंकुलधारा में द्वारिकाधीशपीठ पर पालकी थोड़ी देर के लिए रुकी जहां परछन की रस्म निभाई गई।

हर तरफ जय कन्हैया लाल की जयघोष
शंकुलधारा पर भगवान जगन्नाथ की भव्य आरती उतारी गई। यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और मंदिर के अर्चक पुजारी मौजूद रहे। चारों ओर हर हर महादेव और जय कन्हैया लाल का जयघोष हो रहा था। डोली उठाए लोग भी जय जगन्नाथ का जयघोष कर थे थे।
यहां पर भगवान का रथ रोका जाएगा। रविवार को भोर में मंगला आरती और भोग के बाद दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

50 हजार भक्तों ने भगवान जगन्नाथ पर की पुष्पवर्षा
भगवान जगन्नाथ की डोली रथ यात्रा चौराहे पर पहुंच रही है। रास्ते भर में करीब 50 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ और उनके कुटुंब पर पुष्पवर्षा की। डोली के आगे आगे डमरू दल ने डमरू बजाकर लोगों गलियों को भक्तिमय कर दिया। हर कोई अपने घरों की खिड़की और रेलिंग से फूलों की बौछार कर रहा था।

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