21 लाख फेक खातों में गए पीएम किसान योजना के 46 अरब रुपए, कृषि मंत्री बोले- वसूली होगी

21 लाख फेक खातों में गए पीएम किसान योजना के 46 अरब रुपए, कृषि मंत्री बोले- वसूली होगी

यूपी के 2 करोड़ 85 लाख किसान पीएम सम्मान निधि का लाभ उठा रहे हैं। इनमें से 21 लाख अपात्र लोग गलत तरीके से योजना की राशि ले रहे हैं। सरकार ने ऐसे फेक किसानों की जानकारी जुटा ली है, इनके बैंक खातों में भेजी गई रकम को अब वसूला जाएगा।

यूपी के कृषी मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है, "योजना में ऐसे किसानों का भी नाम है, जो इनकम टैक्स फाइल करते थे।

कहीं एक पति-पत्नी दोनों किस्त का लाभ ले रहे हैं।

सरकार ने ऐसे फेक किसानों को आखिरी मौका दिया है। वो चाहें तो ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर ली गई रकम अपनी मर्जी से वापस कर सकते हैं।"

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

लखनऊ। यूपी के 2 करोड़ 85 लाख किसान पीएम सम्मान निधि का लाभ उठा रहे हैं। इनमें से 21 लाख अपात्र लोग गलत तरीके से योजना की राशि ले रहे हैं। सरकार ने ऐसे फेक किसानों की जानकारी जुटा ली है, इनके बैंक खातों में भेजी गई रकम को अब वसूला जाएगा।

यूपी के कृषी मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है, "योजना में ऐसे किसानों का भी नाम है, जो इनकम टैक्स फाइल करते थे। कहीं एक पति-पत्नी दोनों किस्त का लाभ ले रहे हैं। सरकार ने ऐसे फेक किसानों को आखिरी मौका दिया है। वो चाहें तो ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर ली गई रकम अपनी मर्जी से वापस कर सकते हैं।"

11 किस्तें आ चुकी हैं, 12वीं का इंतजार है

साल 2021-22 में यूपी के किसानों के खातों में पहुंचे 2.5 करोड़ रुपए। ये मैप pmkisan.gov.in साइट से लिया गया है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 1 दिसंबर 2018 को हुई थी। इसके तहत किसानों को साल भर में 6000 रूपए का लाभ सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाता है। हर 4 महीने में किसान को 2000 रूपए की किस्त दी जाती है। तो इस तरह की 2000 रूपए की 11 किस्तें यूपी के किसानों को मिल चुकी हैं।

सभी किसानों को 12वीं किस्त का इंतजार है जो 25 सितंबर तक आने की संभावना है। दरअसल, ये 12वीं क़िस्त इसलिए रुकी हुई है क्योंकि सरकार ने योजना का लाभ ले रहे ऐसे 21 लाख लोगों को खोजा है, जो इस योजना के पात्र ही नहीं हैं। इन फेक अकाउंट्स का पता लगाने की वजह से बाकी किस्त आने में समय लगा है।

21 लाख किसानों की रुकी हुई है किस्त

7 सितंबर को हुई बैठक में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने इन फेक अकाउंट्स का आंकड़ा पेश किया।

2 करोड़ 85 लाख किसानों में से 21 लाख किसानों की किस्त रुकी हुई है। वो इसलिए क्योंकि पोर्टल पर उन किसानों का आधार नंबर और भूलेख डाटा गलत दर्ज है। सात सितंबर को हुई बैठक में यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि योजना में लाभ ले रहे कई फेक अकाउंट होल्डर्स सरकारी नौकरी, आयकर भरने वाले और एक ही परिवार के दो-दो लाभार्थी हैं। इन लोगों से सभी 11 किस्तों की रकम वसूली जाएगी।

हर फेक किसान से होगी 22 हजार रुपए की वसूली
कृषि मंत्री शाही ने बताया, “भारत सरकार से मिली लिस्ट में यूपी के लाभार्थी किसानों की संख्या 2.85 करोड़ है। हमने इन सभी लोगों के अकाउंट की जांच की। इसके बाद इनमें से कुल 21 लाख किसान अपात्र पाए गए हैं। इनमें से कई को नोटिस भेजा जा चुका है। बचे हुए लोग को नोटिस भेजने की प्रकिया जारी है। हर अपात्र व्यक्ति से 22-22 हजार रुपए की वसूली की जाएगी।”

हर साल पात्र किसानों को दिए गए 6 हजार रुपए

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी, 2019 को गोरखपुर से पीएम-किसान योजना की शुरुआत की थी। 

पीएम किसान योजना में किसानों को सालाना 6 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। ये रकम किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपए करके हर 4 महीने के गैप में भेजी जाती है। योजना में 80,258 किसानों के नए आवेदन भी मिले हैं। यूपी के अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी ने बताया, "पीएम किसान निधी योजना, यूपी में 9 सितंबर के बाद अकाउंट वैरिफिकेशन, भूलेख सत्यापन और डेटा अपलोड करने का काम जारी रहेगा। सभी किसान जल्द से जल्द कृषि विभाग और तहसील से भूलेख सत्यापन करवा सकते हैं।"

लेखपाल से साठ-गांठ कर अपात्र भी बन जाते हैं योजना के हकदार

गांवों में लोग जन सेवा केंद्र और कैफे में जाकर पीएम किसान योजना में ऑनलाइन eKYC अपलोड करवा सकते हैं।

गांवों में लोग जन सेवा केंद्र और कैफे में जाकर पीएम किसान योजना में ऑनलाइन eKYC अपलोड करवा सकते हैं।

देश में पारंपरिक खेती और ग्रामीण विकास पर 12 साल से काम कर रहे वरिष्ठ पत्रकार दिवेंद्र सिंह कहते हैं, "गांवों में एक गलत प्रैक्टिस लगातार सामने आ रही है। लोग लेखपाल की मदद से पिता के नाम पर रजिस्टर्ड कृषि भूमि पर खुद नाम चढ़वाकर उसे सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं। इससे उनका नाम भी योजना के डेटा में शामिल हो जाता है।"

दिवेंद्र आगे कहते हैं, "योजना का सिस्टम डेटाबेस ऐसा है कि कोई भी नया नाम आने से उसकी नई आईडी जनरेट हो जाती है। बाद में पता चलता है जमीन की एक ही गाटा संख्या पर दो लोगों के नाम दर्ज हैं। तब इन फेक अकाउंट्स की पहचान हो पाती है।"

इन 7 तरह के किसानों को नहीं मिलना चाहिए था लाभ…

  • संस्थागत जमीन के मालिक किसानों को।
  • कोई भी किसान जिसके परिवार का कोई भी सदस्य किसी संवैधानिक पद पर हो या रहा हो।
  • जिनके परिवार का कोई भी सदस्य बड़े राजनीतिक पद से लेकर जिला पंचायत का अध्यक्ष तक हो या रहा हो।
  • जिसके परिवार में ग्रुप डी कर्मचारी छोड़ कर कोई भी सरकारी कर्मचारी हो या रहा हो।
  • जिसके परिवार में 10,000 या उससे अधिक की पेंशन पाने वाला कोई भी रिटायर्ड कर्मचारी हो।
  • जिसके परिवार में कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर, जीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट या फिर अन्य पेशेवर हो।
  • हाल के साल में टैक्स का भुगतान करने वाला कोई भी किसान पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ लेने का पात्र नहीं है।

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