सावरकर के पोते ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, कहा-अपमान करना कांग्रेस को महंगा पड़ेगा

सावरकर के पोते ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, कहा-अपमान करना कांग्रेस को महंगा पड़ेगा

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

मुंबई। विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के पोते ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। साथ ही पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने स्वतंत्रता सेनानी का अपमान किया है।

इसलिए उनपर सख्त एक्शन लिया जाए।  इसके अलावा इसी तरह के बयान देने के लिए महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले को लेकर भी शिकायत की गई है।

राहुल गांधी के खिलाफ महाराष्ट्र में कई जगह हो रहा विरोध

दरअसल, गुरुवार दोपहर वीडी सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने शिवाजी पार्क थाने में राहुल गांधी के पर शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। रंजीत सावरकर ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और कांग्रेस ने वीर सावरकर का अपमान किया हो।

इसके पहले भी वह कई बार स्वतंत्रता सेनानी का अपमान कर चुके हैं। अगर एक्शन नहीं लिया गया तो कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू करेंगे। हालांकि सावरकर समर्थकों और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के इस बयान का विरोध करते हुए नासिक, सोलापुर समेत कई जगहों पर विरोध करना शुरू कर दिया है।

जानिए राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर क्या कहा...

बता दें कि राहुल गांधी इन दिनों अपनी भारत जोड़ो यात्रा के चलते महाराष्ट्र में है। जहां वह रोजाना बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोल रहे हैं। इसी दौरान राहुल ने अकोला जिले के वाडेगांव में एक पत्रकारों से बात करते हुए वीर सावरकर का जिक्र किया है।

उन्होंने कहा-भारतीय जनता पार्टी जिसको आदर्श मानती है वह सावरकर अंग्रेजों के साथ खड़े रहे। उन्होंने जेल में रहते हुए माफीनामा लिखकर भारत के खिलाफ अंग्रेजों का समर्थन करने का आश्वासन दिया था। माफीनामा में खुद को अंग्रेजों का आज्ञाकारी सेवक बताया था। 

राहुल गांधी ने अंग्रेजों के समय का पत्र दिखाया

राहुल गांधी ने आगे 1920 के सरकारी रिकॉर्ड से दस्तावेज दिखाए, जिसमें दावा किया गया कि उनमें सावरकर द्वारा अंग्रेजों को लिखा गया एक पत्र है। बीजेपी से सवाल किया कि जब उन्होंने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए तो क्या कारण था? यह डर था।

वह अंग्रेजों से डरते थे। राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और वल्लभभाई पटेल ने कई साल जेल में बिताए लेकिन उन्होंने कभी इस तरह के पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए।

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