असम पुलिस के कमांडोज को आर्मी कर रही ट्रेंड, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह?

असम पुलिस के कमांडोज को आर्मी कर रही ट्रेंड, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह?

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

गुवाहाटी। असम पुलिस के नवनियुक्त कमांडो( Newly-recruited commandos of Assam Police) को बेहतर क्षमता निर्माण और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंडियन आर्मी ट्रेनिंग दे रही है। एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि असम और मेघालय के सात स्थानों पर 40 दिवसीय ट्रेनिंग सोमवार(21 नवंबर) से शुरू हुई थी। 

यह भी जानिए

ट्रेनिंग दो फेज में आयोजित की जा रही है। पहला-बेसिक फेज और दूसरा एडवांस फेज। बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग का फोकस ट्रेनीज को मेंटली और फिजिकली दोनों रूप से मजबूत बनाना है।

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा कि एडवांस मिलिट्री ट्रेनिंग में सामरिक युद्ध कौशल( tactical combat skills) के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की स्थिति के रखरखाव से संबंधित पहलुओं और  विभिन्न पुलिसिंग भी सिखाई जाएगी। 

उन्होंने कहा, "यह संयुक्त पहल न केवल राज्य की सुरक्षा संरचना के लिए क्षमता निर्माण में मदद करेगी, बल्कि यह राज्य और सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता और तालमेल को और बढ़ाएगी।

अधिकारी ने कहा कि सेना और राज्य पुलिस दशकों से संयुक्त अभियान चला रहे हैं और असम राज्य में काफी हद तक सामान्य स्थिति लाने में इनकी बड़ी भूमिका रही है।

बता दें कि असम सरकार ने हाल के दिनों में 300 से अधिक महिलाओं सहित लगभग 2,700 कर्मियों की भर्ती करके और पांच नई कमांडो बटालियन बनाकर राज्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है।

लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा, "राष्ट्र निर्माण के प्रयासों और निस्वार्थ सेवा को जारी रखते हुए भारतीय सेना ने कमांडो बटालियन प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने के लिए अपनी सहायता दी है।

असम सरकार ने इस महीने की शुरुआत में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए बटालियनों के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (प्रशिक्षण) के रूप में 34 सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को अनुबंध के आधार पर शामिल करने का फैसला किया था। 

पंगा नहीं लेगा पाकिस्तान

Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कई स्टार प्रचारक मैदान में उतारे हैं। इनमें हर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इनमें दो मुख्यमंत्रियों के नाम ऐसे हैं, जिनकी इस चुनाव में खूब चर्चा और डिमांड है।

ये नाम हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा। सरमा ने यहां एक चुनावी सभा में श्रद्धा मर्डर केस का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे देश में लिव इन जिहाद पर कानून लाया जाना चाहिए।

आज देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत। इसे सिर्फ भाजपा ला सकती है। उन्होंने कहा कि जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से पाकिस्तान को पता चल गया है कि भारत से पंगा नहीं लेना। अगर यहां दो धमाके भी हुए तो पाकिस्तान में 20 बम फटेंगे।

Share this story