सर्जरी के बाद पैर में इतना टाइट बांधा बैंडेज कि टिश्यू डैमेज हो गए, 18 वर्षीय टैलेंटेड फुटबॉलर की मौत

सर्जरी के बाद पैर में इतना टाइट बांधा बैंडेज कि टिश्यू डैमेज हो गए, 18 वर्षीय टैलेंटेड फुटबॉलर की मौत

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

चेन्नई। चेन्नई की 18 वर्षीय फुटबॉलर प्रिया( football player R Priya) की दाहिने पैर के लिगामेंट की सर्जरी के हफ्तेभर बाद हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप है सर्जरी के बाद डॉक्टरों की लापरवाही से पैर में इतना कसकर कम्प्रेशन बैंडेज बांध दिया गया कि टिश्यू ही डैमेज हो गए।

लिहाजा उसका पैर काटना पड़ा, फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका। यह मामला सोशल मीडिया पर #JusticeForPriya से ट्रेंड में हैं। लोग एक होनहार फुटबॉलर की मौत के लिए न्याय मांग रहे हैं। पढ़िए पूरी डिटेल्स...

Shocking case of death of 18 year old Chennai based footballer R Priya due to medical negligence, Justice For Priya is trending on social media kpa

पढ़िए डॉक्टरों की लापरवाही से जान गंवाने वाली टैलेंटेड फुटबॉलर से जुड़े 10 फैक्ट्स
1. चेन्नई की 18 साल की फुटबॉलर आर प्रिया(Chennai footballer R Priya) को पूरा भरोसा था कि उसके फुटबॉल का टैलेंट उसे गर्वनमेंट जॉब दिलवा देगा। लेकिन 15 नवंबर को राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (RGGGH) में डॉक्टरों की कथित चिकित्सा लापरवाही( medical negligence) के कारण उसके मल्टीपल ऑर्गन फेल होने से मौत हो गई।

2. प्रिया ने अपने दाहिने घुटने में फटे लिगामेंट(repair torn ligaments) की सर्जरी कराई थी, ताकि उसे बेहतर फुटबॉल खेलने में मदद मिल सके। हालांकि, 7 नवंबर को शुरुआती सर्जरी और बाद में दो फॉलो-अप सर्जरी के एक हफ्ते बाद प्रिया RGGGH की गहन देखभाल इकाई (ICU) में साथ बेहोश हो गई थी। मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई।

3. प्रिया चेन्नई के क्वीन मैरी कॉलेज में फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में प्रथम वर्ष की छात्रा थी। 26 अक्टूबर को पेरियार नगर के गवर्नमेंट पेरिफेरल अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रिया को बताया कि उनके दाहिने घुटने में लिगामेंट फट गया है और इसे एक सर्जरी के माध्यम से ठीक करना होगा। जब प्रिया और उसका परिवार सेकंड ओपेनियन के लिए RGGGH के डॉक्टरों से मिले, तो उन्होंने भी उन्हें पेरियार नगर अस्पताल में सर्जरी कराने की सलाह दी, जो उनके घर के करीब था।

4. प्रिया की शुरुआती सर्जरी 7 नवंबर को पेरियार नगर अस्पताल में की गई, लेकिन उसी शाम को प्रिया को पैरों में दर्द की शिकायत होने लगी। डॉक्टरों ने दर्द के लिए प्रिया को टाइट कम्प्रेशन बैंडेज(tight compression bandage) बांधने को दिया। कुछ दवाइयां भी खाने को दीं। 

5. अगली सुबह प्रिया के पैर में एक संदिग्ध रक्त के थक्के(suspected blood clot) के कारण उसे RGGGH में रेफर कर दिया गया। RGGGH के डॉक्टरों ने तब कई टेस्ट किए और प्रिया के परिवार को बताया किया कि उसके दाहिने पैर के टिश्यूज मर चुके हैं। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि केवल पैर काटकर ही उसकी जान बचाई जा सकती है।

6. 9 नवंबर को प्रिया का सर्जरी वाला पैर काटकर निकाल दिया गया। हालांकि, उनका दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तब सोमवार, 14 नवंबर को RGGGH में उसकी दूसरी फॉलो-अप सर्जरी करनी पड़ी। 

7. RGGGH के डीन डॉ ई थेरानीराजन ने तब मीडिया को बताया था कि यह ट्रीटमेंट प्लान यह इंश्योर करने के लिए है कि आगे कोई नेक्रोसिस (necrosis-death of body tissue) यानी  बॉडी टिश्यू की मौत या ऑर्गन फेल्योर न हो। हालांकि प्रिया को बचाया नहीं जा सका।

8. इस मामले में पेरियार सिटी हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों को पहले राज्य के हेल्थ डिपार्टमेंट ने जांच के आदेश के बाद उनकी ओर से लापरवाही मिलने पर ट्रांसफर कर दिया था। बाद में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एमए सुब्रमण्यम ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।

9. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने कहा कि इन डॉक्टरों के खिलाफ खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी प्रिया के परिवार के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।

10. हेल्थ मिनिस्टर ने 15 नवंबरको मीडिया से बातचीत में कहा कि पेरियार नगर अस्पताल में उनकी आर्थ्रोस्कोपी (जोड़ों की समस्याओं के निदान और उपचार के लिए एक प्रक्रिया) सफलतापूर्वक की गई थी, लेकिन रक्त के थक्के को रोकने के लिए उसके पैर में कम्प्रेशन बैंडेज बहुत कसकर लपेट दिया गया था, जिससे रक्त शिराओं( blood veins) डैमेज हो गईं। हेल्थ मिनिस्टर ने मीडिया से कहा कि रविवार को जब वह मिलने गए, तो प्रिया स्वस्थ थी। लेकिन आधी रात के बाद ब्लड फ्लो में समस्या के कारण कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और 15 नवंबर की सुबह सवा सात बजे प्रिया की मौत हो गई। हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि ट्रीटमेंट ठीक हुआ था, लेकिन मौत चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई है।

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