राज्यसभा में PM मोदी की स्पीच, विपक्ष का वॉकआउट:PM बोले- पेपर लीक के दोषियों को छोड़ेंगे नहीं

राज्यसभा में PM मोदी की स्पीच, विपक्ष का वॉकआउट:PM बोले- पेपर लीक के दोषियों को छोड़ेंगे नहीं

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ 

 

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दिया। 1 घंटा 50 मिनट की स्पीच में प्रधानमंत्री NEET, मणिपुर संविधान, कांग्रेस, पश्चिम बंगाल, रोजगार, भ्रष्टाचार, CBI-ED, फेडरलिज्म, इमरजेंसी, जम्मू-कश्मीर, इंदिरा, राहुल, दलितों पर बोले।

प्रधानमंत्री मोदी जब 32 मिनट बोल चुके थे, तब विपक्ष के नेताओं ने सदन से वॉकआउट किया। वॉकआउट प्रधानमंत्री द्वारा सोनिया गांधी पर निशाना साधने के बाद हुआ। उन्होंने कहा- ये लोग ऐसे हैं, जो ऑटो पायलट और रिमोट पायलट पर सरकार चलाने के आदी हैं। वे काम करने में विश्वास नहीं रखते, वे बस इंतजार करना जानते हैं।

इस पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ बोले- ये लोग मुझे नहीं, संविधान को पीठ दिखा रहे हैं। PM ने कहा- कल उनकी सारी हरकतें फेल हो गईं, इसलिए वे मैदान छोड़कर भाग गए। नारे लगाना, चिल्लाना और भाग जाना, यही उनकी नियति है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए राज्यसभा में आते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। सांसदों ने उनका खड़े होकर अभिवादन किया।

(राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए राज्यसभा में आते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। सांसदों ने उनका खड़े होकर अभिवादन किया।)

राज्यसभा में पीएम मोदी के जवाब के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। बाहर आकर मीडिया से चर्चा करते राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे।

(राज्यसभा में पीएम मोदी के जवाब के दौरान विपक्ष ने वॉकआउट किया। बाहर आकर मीडिया से चर्चा करते राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे।)

 

मोदी के भाषण की 10 बातें...

1. पेपर लीक पर
पेपर लीक एक बड़ी समस्या है। मेरी इच्छा थी, सारे दल इस पर अपनी राय रखते। लेकिन यह मुद्दा भी इन्होंने राजनीति की भेंट चढ़ा दी। मैं देश के नौजवानों को आश्वस्त करता हूं कि आपको धोखा देने वालों को यह सरकार छोड़ने वाली नहीं है। इन्हें सख्त सजा मिले, इसलिए एक के बाद एक एक्शन लिए जा रहे हैं। हमने इसके लिए सख्त कानून बनाया है।

2. मणिपुर हिंसा पर
मणिपुर में लगातार हिंसक घटनाएं कम हो रही हैं। स्कूल-कॉलेज, दफ्तर और अन्य संस्थान चल रहे हैं। मणिपुर में भी परीक्षाएं हुई हैं। जो भी तत्व मणिपुर की आग में घी डाल रहे हैं, एक समय आएगा जब मणिपुर उन्हें रिजेक्ट कर देगा।

जो लोग मणिपुर का इतिहास जानते हैं, उन्हें पता है कि वहां सामाजिक संघर्ष का इतिहास रहा है। इन्हीं कारणों से मणिपुर में 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। मैं इस सदन में देश को बताना चाहता हूं कि 1993 में मणिपुर में ऐसी ही घटनाएं हुई थीं, जो 5 साल चली थीं। यह इतिहास समझकर हमें स्थितियों को ठीक करना है।

3. कांग्रेस पर
बहुत सी पार्टियां उनके (कांग्रेस के) साथ बैठी हैं, वह अल्पसंख्यकों की हितैषी होने का दावा करती हैं। वे मुजफ्फरनगर तुर्कमान गेट पर क्या हुआ, उसको क्लीन चिट देती है। ऐसे लोग हाथ में संविधान की कॉपी लेकर अपने काले कारनामे छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

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