कांग्रेस अध्यक्ष :गहलोत-थरूर के बाद कमलनाथ और मनीष तिवारी की चर्चा, दिग्विजय सिंह भी सोनिया से मिलेंगे

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कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए अब दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी है। पहले ऐसा लग रहा था कि राहुल गांधी के नाम पर सहमति बन जाएगी, लेकिन शशि थरूर और बाद में अशोक गहलोत के चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच अब दो पूर्व मुख्यमंत्री और एक पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत तीन नए नाम और सामने आ रहे हैं।

इनमें मध्य प्रदेश के पूर्व CM कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह आज दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वे पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में खुद को भी दावेदार बताया था।

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए अब दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी है। पहले ऐसा लग रहा था कि राहुल गांधी के नाम पर सहमति बन जाएगी, लेकिन शशि थरूर और बाद में अशोक गहलोत के चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच अब दो पूर्व मुख्यमंत्री और एक पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत तीन नए नाम और सामने आ रहे हैं।

इनमें मध्य प्रदेश के पूर्व CM कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह आज दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वे पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में खुद को भी दावेदार बताया था।

इधर मनीष तिवारी से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि वे पार्टी के स्टेट डेलिगेट्स से मिलने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में गए थे। ये स्टेट डेलिगेट्स चुनाव में वोटर हैं। अध्यक्ष पद के हर उम्मीदवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के का चुनाव लड़ने के लिए 10 डेलिगेट्स की जरूरत होती है। ये डेलिगेट्स ही उम्मीदवार के नाम को प्रस्तावित करते हैं।

1. G-23 ग्रुप का हिस्सा हैं मनीष तिवारी

मनीष तिवारी कांग्रेस 5 साल तक NSUI और 2 साल तक यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

मनीष तिवारी कांग्रेस के उस G-23 ग्रुप का हिस्सा हैं, जिन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में सुधार की मांग की थी। इस साल 26 अगस्त को G-23 समूह के सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया को तमाशा और दिखावा करार देते हुए इस्तीफा दे दिया था।

तिवारी पंजाब के श्री आनंदपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक, त‍िवारी 24 स‍ितंबर को द‍िल्‍ली पहुंच रहे हैं। दिल्ली में ही वे अपने समर्थकों से चर्चा करेंगे। इसके बाद चुनाव लड़ने से जुड़ा फैसला लेंगे। त‍िवारी 5 साल तक NSUI और 2 साल तक यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

2. AICC के महासचिव रह चुके हैं दिग्विजय सिंह

राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व CM दिग्विजय सिंह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव रह चुके हैं। साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। बुधवार को NDTV को दिए एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी से अध्यक्ष पद संभालने की अपील की थी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राहुल के अलावा अशोक गहलोत या शशि थरूर को नेतृत्व की भूमिका में पसंद करेंगे, तो दिग्विजय सिंह ने कहा- चलो देखते हैं। मैं खुद को भी खारिज नहीं कर रहा हूं, आप मुझे बाहर क्यों रखना चाहते हैं? दिग्विजय ने कहा कि हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। आपको 30 तारीख की शाम को जवाब पता चल जाएगा।

3. AIPC के चेयरमैन हैं शशि थरूर

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर केरल के तिरुअनंतपुरम से लोकसभा सांसद हैं। वे ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। वे कांग्रेस के G-23 नेताओं में से एक हैं। 19 सितंबर को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सोनिया से चुनाव लड़ने की इजाजत मांगी।

हालांकि, सोनिया ने उन्हें साफ शब्दों में कहा कि चुनाव लड़ने का फैसला आपका है। यानी ये आपका कॉल है, पार्टी की चुनावी प्रक्रिया तय नियमों के हिसाब से ही होंगी। इसमें सभी को बराबर का अधिकार है। थरूर सुबह कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे और सेंट्रल इलेक्शन ऑथोरिटी से मुलाकात की।

4. कमलनाथ ने संभाली थी कांग्रेस महासचिव की जिम्मेदारी

कमलनाथ मध्य प्रदेश के CM रह चुके हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से 9 बार सांसद रहे कमलनाथ मनमोहन सरकार में शहरी विकास मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। वे कांग्रेस के महासचिव और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के भी रह चुके हैं।

कमलनाथ ने 2004 से लेकर 2014 तक कांग्रेस सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। इसमें उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क और परिवहन मंत्रालय प्रमुख हैं।

5. अध्यक्ष पद की रेस में गहलोत आगे

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे हैं। इस सिलसिले में उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से बुधवार शाम दो घंटे बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, यह पता नहीं चल पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनिया ने इतना ही कहा कि पार्टी अध्यक्ष पद के लिए इस चुनाव में वे किसी का फेवर नहीं करेंगींं। उधर, गहलोत गुरुवार को राहुल गांधी से मिलने कोच्चि भी जाएंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं एक बार और प्रयास कर रहा हूं राहुल गांधी को अध्यक्ष पद के लिए मनाने का। राहुल गांधी के हां या ना कहने पर ही मैं वापस आऊंगा। इसके बाद अब आगे का मूवमेंट तय होगा।

सीएम और अध्यक्ष दोनों पदों पर रहने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि समय बताएगा कि मैं कहा रहूंगा, कहां नहीं रहूंगा। एक पद, एक व्यक्ति फॉर्मूला पर उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा तो ये है कि मैं किसी पद पर न रहूं, क्योंकि मैं बहुत पद पर रह चुका हूं। मेरे उपस्थिति से पार्टी को फायदा होना चाहिए, कांग्रेस मजबूत होनी चाहिए, मैं यह चाहता हूं। गहलोत ने कहा कि इतने सालों में पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है।'

इलेक्शन के लिए नोटिफिकेशन जारी
कांग्रेस इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन मधुसूदन मिस्त्री ने अध्यक्ष चुनाव के लिए गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी किया। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 24 से 30 सितंबर तक चलेगी। 1 अक्टूबर को नॉमिनेशन की जांच की जाएगी और उसी दिन वैलिड कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की जाएगी।

उम्मीदवारी वापस लेने के लिए आखिरी तारीख 8 अक्टूबर है। अगर एक से अधिक कांग्रेस नेता ने नामांकन दाखिल किया तो 17 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 19 अक्टूबर को नतीजे आएंगे।

इधर, राहुल गांधी 23 सितंबर को भारत जोड़ो यात्रा से ब्रेक लेकर दिल्ली आएंगे। रमेश ने कहा कि राहुल अपनी मां सोनिया से मिलेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल इस दौरान सोनिया से नए अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा कर सकते हैं। सोनिया गांधी ने 20 सितंबर को संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को केरल से वापस बुलवाया था।

राहुल बोले- मेरा काम RSS-भाजपा की विचारधारा को खत्म करना

इस बीच राहुल गांधी ने अध्यक्ष चुनाव में अपने रोल पर सस्पेंस तो नहीं तोड़ा है, लेकिन उन्होंने यह जरूर साफ किया कि एक व्यक्ति एक ही पद पर रहेगा। भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल ने कोच्चि में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पत्रकारों ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने का सवाल किया तो राहुल ने जवाब दिया- मैं वही कहूंगा, जो पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था। मेरा स्टैंड क्लियर है। जो भी होगा, जल्द ही सबको पता चल जाएगा। मेरा काम भाजपा-RSS की विचारधारा खत्म करना है।

राहुल ने कहा- कांग्रेस अध्यक्ष संगठनात्मक पद नहीं है, यह एक विचारधारा है। यह पद बिलीव सिस्टम और आइडिया का प्रतिनिधित्व करता है। हम ऐसी मशीन से लड़ रहे, जिसके पास बहुत पैसा है, जिससे वो किसी को भी खरीद सकते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

भारत जोड़ो यात्रा यूपी में सिर्फ एक दिन रहने के सवाल पर उन्होंने कहा- हम बिहार, गुजरात, बंगाल भी नहीं गए। हमारी यात्रा का उद्देश्य भारत के एक छोर से दूसरे छोर तक जाना है। हमारे पास यूपी को लेकर विजन है।

केरल की लेफ्ट सरकार के खिलाफ यात्रा में कुछ नहीं बोलने के सवाल पर राहुल बोले- इस यात्रा में मेरा उद्देश्य लोगों से मिलना और उन्हें जानना है। मैं नफरत फैलाने नहीं निकला हूं। गरीब लोग महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। मैं उन सब को जोड़ने निकला हूं। मैं विचारधारा से लेफ्ट संगठनों से सहमत नहीं हूं।

यात्रा के अनुभव पर कहा- मछली पालने वाले जमीन पर कब्जे की बात कह रहे हैं। रबड़ का काम करने वाले कह रहे हैं कि अफ्रीका से सप्लाई ली जा रही है, जिससे हमें नुकसान हो रहा है। देश के दो चार बड़े व्यापारी हैं, उन्हें ही सारे काम दिए जा रहे हैं।

पत्रकार से राहुल ने पूछा, आपको भी तो नया मालिक मिल गया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक मीडिया ग्रुप के पत्रकार के सवाल पर राहुल ने मजाकिया अंदाज में कहा- आपको भी तो नया मालिक मिल गया। अब सोचिए ये व्यापारी कहां तक हैं। पत्रकारिता की विचारधारा पर भी इनका कब्जा हो रहा है। उन्होंने कहा- देश में एक ही नेता हैं, जो मीडिया के सवालों से बचते हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी नहीं करते।

दिल्ली पहुंचने पर गहलोत ने कहा कि अगर पार्टी के लोगों को लगता है कि अध्यक्ष या CM पद पर मेरी जरूरत है तो मैं मना नहीं कर सकता। मेरे लिए पद कोई मायने नहीं रखता। एक पद, एक व्यक्ति का नियम केवल नॉमिनेटेड पोस्ट के लिए है। चुनाव लड़कर कोई भी दो पोस्ट पर रह सकता है।

क्या बदलेगी पारिवारिक परंपरा
अगर गहलोत और थरूर चुनाव लड़ते हैं तो 24 साल बाद ऐसा पहली बार होगा जब गांधी परिवार से अलग कोई कैंडिडेट चुनावी मैदान में होगा। साल 1997 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए तीन दिग्गज मैदान में अड़े हुए थे। सीताराम केसरी, शरद पंवार और राजेश पायलट। तीनों के बीच की लड़ाई कांग्रेस के इतिहास में सबसे रोचक किस्सों में से एक मानी जाती है।

तब सीताराम केसरी ने शरद पंवार और राजेश पायलट दोनों को भारी-भरकम अंतर से हराया। केसरी को 6,224 वोट मिले, लेकिन पंवार को 882 और पायलट को 354 वोट ही मिल पाए। आजादी के बाद से ही कांग्रेस पार्टी में गांधी-नेहरू परिवार का ही बोलबाला रहा है। यह भी सच है कि 40 सालों में महज दो बार ही अध्यक्ष पद पर चुनाव हुए हैं।

आखिरी बार 22 साल पहले हुआ था चुनाव
कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए साल 2000 में चुनाव हुआ था। तब सोनिया गांधी के सामने जितेंद्र प्रसाद थे। सोनिया गांधी को करीब 7448 वोट मिले, लेकिन जितेंद्र प्रसाद 94 वोटों पर ही सिमट गए। 2000 में सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने पर गांधी परिवार को कभी कोई चुनौती नहीं मिली।

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने पर भी कोई चुनौती नहीं दे पाया। राहुल गांधी 2017 से 2019 तक अध्यक्ष बने। सोनिया गांधी का कार्यकाल 1998 से 2017 तक रहा। साल 2019 में राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद एक बार फिर सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनीं, जो अब तक इस पद पर कायम हैं।

ज्यादा उम्मीदवार होने पर होगा चुनाव
कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करीब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 9000 डेलीगेट्स करेंगे। वहीं कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 23 सदस्यों में से 12 चुने जाएंगे, जबकि 11 नामित होंगे। अगर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 12 चुने सदस्यों के लिए अधिक उम्मीदवार होंगे, तो उनके लिए भी चुनाव होगा, अगर 23 नाम पर सर्वसम्मति होगी तो चुनाव नहीं होगा। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव पूरा होने के बाद होगा।

नामांकन भरने वालों को रखना होगा ये ध्यान
चुनाव प्रक्रिया की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे पार्टी के सीनियर लीडिर मधुसूदन मिस्त्री ने गुरुवार को कहा था कि जो लोग कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करना चाहते हैं वो 20 सितंबर से पहले डेलीगेट्स की लिस्ट देख सकते हैं। वहीं उन्हें अपने नामांकन के लिए 10 प्रदेश कांग्रेस कमेटी डेलीगेट्स का समर्थन दिखाना होगा।

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