जवान बेटे की आत्महत्या और आर्थिक संकट ने बर्बाद कर दिया था कबीर बेदी को, खुद बताया लाइफ का खौफनाक सच

जवान बेटे की आत्महत्या और आर्थिक संकट ने बर्बाद कर दिया था कबीर बेदी को, खुद बताया लाइफ का खौफनाक सच

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

मुंबई। वेटरन एक्टर कबीर बेदी (Kabir Bedi) ने बताया कि 90 के दशक में वह अपनी जिंदगी के सबसे खराब दौर से गुजरे। ये वो खौफनाक दौर था जब उन्होंने अपना 26 साल का जवान बेटा सिद्धार्थ बेदी खो दिया था और इसकी वजह से वे खुद सदमे में चले थे।

इतना ही नहीं उन्हें आर्थिक संकट तक झेलना पड़ा था। दरअसल, उन्होंने अपनी लाइफ से जुड़ी ये बातें हाल ही में उन्हें एक इवेंट में शेयर की। इस दौरान उन्होंने अपनी बायोग्राफी स्टोरीज आई मस्ट टेल: द इमोशनल लाइफ ऑफ एन एक्टर के बारे में भी बात की।

उन्होंने बताया कि इस बुक में जो कुछ भी उन्होंने लिखा है, वो 100 फीसदी सच है। उन्होंने कहा कि अपने बेटे को लेकर भी जो इस बुक में लिखा है, वो भी सच है। बता दें कि सिद्धार्थ, कबीर और उनकी पहली पत्नी प्रोतिमा बेदी का बेटा था।,

जिसने 26 साल की उम्र में 1997 में आत्महत्या कर ली थी। दरअसल, वो सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी से ग्रस्त था। नीचे पढ़ें 76 साल के कबीर बेदी ने अपनी जिंदगी के अनसुने किस्से को बताते हुए क्या-क्या राज खोले...

उन्होंने बताया कि जब उनका बेटा सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी की चपेट था उस वक्त उन्हें भारी नुकसान हुआ था। इस बुक में मैंने डिटेल में बताया कि कैसे मैं इस दौर से गुजरा और कैसे इन चीजों से निपटा। मैंने उसे आत्महत्या करने से रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन मैं उसे बचा नहीं पाया। और इस बात गिल्ट मुझे आज भी है। 

इवेंट में उन्होंने बताया- मैं जानता था कि मेरा बेटा सुसाइड करने वाला है लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी मैं उसे बचा नहीं पाया। इस बात का गम उन्हें आज भी सताता है। उनका बेटा सीजोफ्रेनिया का शिकार हो गया था। 

उन्होंने बताया-  सिद्धार्थ बहुत होशियार लड़का था। उसके अंदर कई प्रतिभाएं थीं, लेकिन एक दिन अचानक उसने सोचना बंद कर दिया। हमने बहुत कोशिशें की कि उसकी प्रॉब्लम को समझे, उसे काफी समझाया भी, लेकिन सारी कोशिशें फेल हो गई और वो हमें छोड़कर चला गया। 

उन्होंने कहा- बेटे को खोने के साथ उन्हें एक भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ा, जिसने उसे तोड़कर रख दिया। मेरी स्थिति इस हद तक खराब हो गई थी कि जब मैं ऑडिशन के लिए जाता था मुझे पता नहीं रहता था कि मैं क्या कर रहा हूं।

कबीर बेदी ने बताया- मेरी मनोस्थिति ठीक नहीं थी, जिसकी वजह से मैंने बहुत सारा काम भी खो दिया। पैसे भी नहीं मिले और जो पैसे मेरे पास थे वो भी चले गए। मैं पूरी तरह से तबाह हो गया था। 

उन्होंने कहा- मैंने खुद को उस स्थिति से निकाला और वापस अपनी जगह पाई, ये सारी बातें मैंने अपनी किताब में भी लिखी हैं। उन्होंने कहा- हर कोई त्रासदियों, असफतलाओं से गुजरता है, लेकिन आप दूसरे के अनुभव से उनसे निपटने की सीख ले सकते हैं। 

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