मल्लिकार्जुन खड़गे बनाम शशि थरूर  : कौन होगा कांग्रेस का अगला अध्यक्ष, किसकी दावेदारी ज्यादा मजबूत?

 मल्लिकार्जुन खरगे बनाम शशि थरूर  : कौन होगा कांग्रेस का अगला अध्यक्ष, किसकी दावेदारी ज्यादा मजबूत?
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कल यानी सोमवार 17 अक्‍टूबर को मतदान होना है। इस बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों ने रविवार को बताया कि उम्मीदवार शशि थरूर (Shashi Tharoor) की टीम ने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस निर्देश का मसला उठाया है जिसमें पीसीसी प्रतिनिधियों को मतपत्र पर उनकी पसंद वाले उम्‍मीदवार के नाम के आगे "1" अंकित करने को कहा गया है। मालूम हो कि क्रम संख्या '1' पर मल्लिकार्जुन खड़गे जबकि '2' पर शशि थरूर (Shashi Tharoor) का नाम है। 

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

नई दिल्‍ली । कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कल यानी सोमवार 17 अक्‍टूबर को मतदान होना है। इस बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों ने रविवार को बताया कि उम्मीदवार शशि थरूर (Shashi Tharoor) की टीम ने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस निर्देश का मसला उठाया है जिसमें पीसीसी प्रतिनिधियों को मतपत्र पर उनकी पसंद वाले उम्‍मीदवार के नाम के आगे "1" अंकित करने को कहा गया है। मालूम हो कि क्रम संख्या '1' पर मल्लिकार्जुन खड़गे जबकि '2' पर शशि थरूर (Shashi Tharoor) का नाम है। 

 चुनाव प्रक्रिया को लेकर ऐसे पैदा हुआ कंफ्यूजन
अब बताते हैं कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर कंफ्यूजन पैदा कैसे हुआ। दरअसल, शनिवार को प्राधिकरण की ओर से जारी मतदान संबंधी दिशा-निर्देश में मधुसूदन मिस्त्री ने कहा था कि पीसीसी सदस्य अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे मतपत्र पर '1' का निशान लगाएंगे और मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डाल देंगे। इस तरह से मतदान की प्रक्रिया संपन्‍न होगी। सूत्रों का कहना है कि शशि थरूर (Shashi Tharoor) की टीम की ओर से कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर कंफ्यूजन की शिकायत किए जाने के बाद अब प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव किया गया है।

पहले चुनाव के बारे में जान लीजिए
कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए सोमवार सुबह दस बजे से वोटिंग शुरू हो जाएगी। चार बजे तक वोटिंग का समय निर्धारित किया गया है। देश भर में 40 केंद्रों पर इसके लिए 68 बूथ बनाए गए हैं। करीब 9800 मतदाता इसमें हिस्सा लेंगे जो अलग-अलग प्रदेशों के प्रतिनिधि हैं। 

सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी समेत अन्य सीडब्ल्यूसी के सदस्य कांग्रेस मुख्यालय में बने बूथ में मतदान करेंगे। एक बूथ भारत जोड़ो यात्रा के कैंप में भी बनाया गया है, जहां राहुल गांधी और करीब 40 मतदाता मतदान करेंगे। मल्लिकार्जुन  बेंगलुरु और शशि थरूर तिरुवनंतपुरम स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मतदान करेंगे। 

मतदान के बाद मतपेटियों को दिल्ली लाया जाएगा, जहां पार्टी मुख्यालय में 19 अक्टूबर को मतगणना होगी और नतीजे घोषित होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 22 साल बाद चुनाव होने जा रहा है और करीब 24 साल के बाद पार्टी की कमान गांधी परिवार के बाहर जाना तय हो गया है। 

थरूर की टीम ने शिकायत की
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री ने कहा है कि अब पसंदीदा उम्मीदवार के नाम पर '1' के बजाय टिक मार्क लगाया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि शशि थरूर (Shashi Tharoor) की टीम ने मिस्त्री के सामने इस मुद्दे को उठाया था कि इससे मतदाता भ्रमित हो सकते हैं क्योंकि मतपत्र पर खड़गे क्रमांक 1 पर जबकि थरूर क्रमांक 2 पर मौजूद हैं। पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे '1' लिखने से थरूर गुट को नुकसान होने की आशंकाएं हैं।

थरूर की दावेदारी कितनी मजबूत?

1. केरल व अन्य दक्षिण राज्यों से वोट मिलने की संभावना
शशि थरूर 13 साल से केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद हैं। दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस को मजबूत करने में भी थरूर काफी आगे रहे हैं। वह केवल दक्षिण नहीं, बल्कि उत्तर भारत में भी काफी चर्चित हैं। ऐसे में थरूर के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को काफी फायदा हो सकता है। थरूर को दक्षिण राज्यों के अलावा उत्तर भारत से भी वोट मिलने की संभावना है। 
  
2. कांग्रेस में अंदरूनी उठापटक का फायदा 
कांग्रेस में बदलाव चाहने वाले युवाओं के बीच थरूर की लोकप्रियता पहले से ज्यादा है। कुछ राज्यों में भले ही कांग्रेस नेताओं ने खुलकर थरूर का समर्थन नहीं किया है, लेकिन अंदर तौर पर वह जरूर चाहते हैं कि पार्टी में बदलाव हो। ऐसे में पार्टी के अंदर बदलाव चाहने वाले नेता जरूर थरूर का साथ दे सकते हैं। थरूर भी ऐसी ही उम्मीद लगाकर बैठे हैं। 
 
3. देशभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग
शशि थरूर के पास भले ही मल्लिकाअर्जुन खरगे जितना संगठन का अनुभव न हो, लेकिन आम लोगों में थरूर खरगे से ज्यादा लोकप्रिय चेहरा हैं।  शशि थरूर एक पैन इंडिया पॉपुलर नेता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर थरूर की फॉलोइंग कांग्रेस के अधिकतर नेताओं से ज्यादा ही रही है। 
 
4. चपलता-तर्कशीलता और बोलने में ज्यादा प्रभावी थरूर
बेहतरीन अंग्रेजी, ठीक-ठाक हिंदी और कई अन्य भाषाओं में महारत होने की वजह से वे युवाओं के बीच अलग अपील लेकर पेश होते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तर्कशीलता को लेकर एक बड़ा तबका उनका फैन है। खासकर विदेश मामलों में भारत का पक्ष रखने को लेकर लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं। 
 
5. कांग्रेस में बदलाव, विपक्ष को झटका देने में सक्षम
बीते कुछ वर्षों में शशि थरूर (67) की छवि युवा नेता के तौर पर बनी है। वे पुरानी कांग्रेस में उस जरूरी बदलाव के तौर पर दिखते हैं, जो कि लंबे समय से नए चेहरों की तलाश में है, ताकि जनता के बीच पार्टी अपना नया परिप्रेक्ष्य पैदा कर सके। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मुकाबले थरूर यह ज्यादा आसानी से करने में सक्षम हैं। वे भारत की पढ़ी-लिखी जनता के बीच भी ज्यादा लोकप्रिय हैं, जो कि अधिकतर मध्यमवर्ग से है और 2014 के बाद से ही भाजपा के साथ जुड़ी है। 

खड़गे की दावेदारी कितनी मजबूत? 
 
1. पार्टी का समर्थन, वरिष्ठ नेताओं का भी मिला साथ : थरूर के मुकाबले मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ ज्यादा कांग्रेसी नेता खड़े दिखाई दे रहे हैं। खासतौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का साथ खड़गे को मिला हुआ है। कहा जाता है कि खड़गे को पार्टी की तरफ से पूरा समर्थन दिया गया है। गांधी परिवार भी खड़गे को ही अध्यक्ष बनाना चाहता है। 

2. दक्षिण से नाता, जमीन से जुड़े नेता रहे: खड़गे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर यहां सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। यहां वह स्टूडेंट यूनियन के महासचिव भी रहे। गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे। 1969 में वह एमकेएस मील्स कर्मचारी संघ के विधिक सलाहकार बन गए। तब उन्होंने मजदूरों के लिए लड़ाई लड़ी। वह संयुक्त मजदूर संघ के प्रभावशाली नेता रहे। 
 
1969 में ही वह कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें गुलबर्गा कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। 1972 में पहली बार कर्नाटक की गुरमीतकल विधानसभा सीट से विधायक बने। खड़गे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला। 2005 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। 2008 तक वह इस पद पर बने रहे। 2009 में पहली बार सांसद चुने गए।
 
खड़गे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं। इसका समय-समय पर उनको इनाम भी मिला। साल 2014 में खरगे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हुआ तो खरगे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया।
 
3. विपक्ष के नेताओं से अच्छे संबंध : मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार के करीबी तो हैं हीं, विपक्ष के अन्य नेताओं से भी उनके अच्छे संबंध हैं। खड़गे का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी जैसे विपक्ष के नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। 
 
4. मजदूरों में अच्छी पकड़, नौ बार विधायक रहे : खड़गे नौ बार विधायक रहे और दो बार लोकसभा सांसद। अभी वह राज्यसभा के सांसद हैं। केंद्र में मनमोहन सिंह सरकार में खड़गे श्रम व रोजगार मंत्री रहे। खड़गे का नाता महाराष्ट्र से भी है। खरगे के पिता महाराष्ट्र से रहे। यही कारण है कि खड़गे बखूबी मराठी बोल और समझ लेते हैं। खड़गे मजदूरों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। लंबे समय तक उन्होंने मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी है। इसका फायदा भी उन्हें मिल सकता है। 
 
5. कर्नाटक, महाराष्ट्र में दिला सकते फायदा : आने वाले समय में कर्नाटक और फिर महाराष्ट्र में भी चुनाव होंगे। ऐसे में खड़गे इन दोनों राज्यों के अलावा दक्षिण के अन्य राज्यों में कांग्रेस को अच्छा फायदा दिला सकते हैं। संगठन और प्रशासनिक कार्यों में माहिर खरगे को प्लानिंग का मास्टर कहा जाता है।

 

अब टिक का चिह्न प्रदर्शित करना होगा
समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक मधुसूद मिस्त्री ने पसंदीदा विकल्प से पहले '1' लिखने को पार्टी के संविधान का हवाला दिया जबकि थरूर की टीम का कहना था कि यह केवल उन मामलों के लिए है जब दो या दो से अधिक उम्मीदवार हों और वरीयताएं बनाई जानी हों। आखिरकार थरूर की टीम की शिकायत पर विचार करने के बाद मिस्त्री ने रविवार दोपहर को बताया कि पसंदीदा उम्‍मीदवार के विकल्प को दर्शाने के लिए अब '1' के बजाय एक टिक का चिह्न प्रदर्शित करना होगा।

अन्‍यथा बेकार हो जाएगा वोट 
मिस्त्री के कार्यालय से प्रतिनिधियों को भेजे जा रहे संदेश में कहा गया है कि मतदाताओं को निर्देश दिया जाता है कि वे जिस उम्मीदवार को वोट देना चाहते हैं, उसके नाम के सामने बॉक्स में टिक मार्क लगाएं और कोई अन्य चिन्ह लगाने या नंबर लिखने से वोट अमान्य हो जाएगा। सनद रहे पूरे चुनाव अभियान के दौरान शशि थरूर की टीम ने केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के निर्देशों के उल्लंघन का जिक्र किया है। यही नहीं थरूर ने पदाधिकारियों द्वारा खुले तौर पर खड़गे के लिए समर्थन व्यक्त करने का मुद्दा भी उठाया है।

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