खतरनाक सौर तूफान किसी भी वक्त पृथ्वी से टकरा सकता है , सौर तूफान का असर मोबाइल फोन के सिग्नल पर पड़ेगा , बिजली जाने की आशंका

Dangerous solar storm can hit the earth at any time, the effect of solar storm will be on the signal of mobile phone, there is a possibility of power loss

Newspoint24/ newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ


नई दिल्ली। खतरनाक सौर तूफान किसी भी वक्त पृथ्वी से टकरा सकता है। इससे रेडियो सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं और बिजली जाने की आशंका भी बनी रहती है।  जो तूफान आएगा, उसे जी2 लेवल का बताया गया है। 

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा  और नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन  का कहना है कि कोरोनल माल एजेक्शन (सीएमई) तीव्र ऊर्जा के साथ अगले 24 घंटे में धरती से टकरा सकती है। जिससे एक सौर तूफान उठेगा, जो बिजली के ग्रिड और इससे जुडे़ दूसरे सामान को खराब कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये तूफान जी2 लेवल का हो सकता है। नासा और एनओएए का कहना है कि इस खतरनाक तूफान के तेज गति के साथ धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने की आशंका है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इंडिया (सीईएसएसआई) का कहना है, ‘हमारा मॉडल बताता है कि इसका धरती पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है, ये रफ्तार 429-575 किलोमीटर प्रति सेकेंड हो सकती है। वर्तमान में सौर हवा और पृथ्वी के पास का अंतरिक्ष पर्यावरण की स्थिति सामान्य हो रही है।’ जाने माने अंतरिक्ष मौसम भौतिकी विज्ञानी डॉक्टर तमिथा स्कोव ने भी इसी तरह की चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि इससे जीपीएस सिस्टम प्रभावित हो सकता है।

क्या हो सकता है नुकसान?

सौर तूफान के कारण धरती पर अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिजली जा सकती है। रेडियो सिग्नल में व्यावधान आ सकता है। रेडियो संचालकों को व्यावधान का सामना करना पड़ सकता है। जीपीएस इस्तेमाल करने वाले भी दिक्कतें महसूस कर सकते हैं। सौर तूफान का असर मोबाइल फोन के सिग्नल पर भी हो सकता है। इससे ब्लैकआउट का भी खतरा है। यही वजह है कि इस तूफान को लेकर हर जगह चिंता जताई जा रही है। इसकी कैटेगरी जी2 रखी गई है। बेशक यह जी5 जितना खतरनाक नहीं है, लेकिन फिर भी इससे काफी नुकसान हो सकता है।

क्या होता है सौर तूफान?

एनओएए का कहना है कि 14 अप्रैल को मध्य, तो वहीं 15 अप्रैल को छोटा सौर तूफान धरती को प्रभावित करेगा। सौर तूफान को जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म और सोलर स्टॉर्म भी कहा जाता है। जो सूरज से निकलने वाला वो रेडिएशन है, जो पूरे सौर मंडल को प्रभावित कर सकता है। इसे धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर असर डालने वाली आपदा भी कहते हैं। जिसका असर पृथ्वी के आसपास के वातावरण की ऊर्जा पर भी पड़ता है। सौर तूफान कोई पहली बार नहीं आ रहा है, बल्कि इससे पहले भी साल 1989 में यह घटना हो चुकी है। उस वक्त इसने कनाडा के क्यूबेक शहर को प्रभावित किया था, जिससे वहां की बिजली 12 घंटे के लिए चली गई थी। जिसके कारण लोगों को काफी परेशान होना पड़ा था। इससे पहले ये तूफान साल 1859 में आया था। तब यूरोप और अमेरिका में टेलीग्राफ नेटवर्क ही नष्ट हो गया था।

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